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दोस्ती !

मेरी बेटी कृति (शुभिका) जब सातवीं कक्षा में पढ़ती थी, अपनी फ्रेंड अलका को साथ लेकर अपनी दूसरी फ्रेंड साक्षी के घर गई। साक्षी ने कृति से कहा कि वह अलका को उसके घर वापिस भेजकर अंदर आ जाए। कृति ने साक्षी से कहा कि, जहां मेरी फ्रेंड की इज़्ज़त नहीं, वहां मुझे भी नहीं रुकना...यह कहकर कृति अलका को साथ लेकर अपने घर वापिस आ गई। मुझे कृति के इस निर्णय पर बहुत गर्व महसूस हुआ, मन ही मन मैं मुस्कुरा रहा था कि रगों में खून का असर तो होता ही है... (मनोज कुमार विट्ठल) for more stories click here

पोस्टमैन से रिश्ता

दिल की बात दूर दूर तक पोस्टमैन पहुंचा दिया करता था। एक दोस्ती भरा रिश्ता सा बन गया था उसके साथ। मानो एक पुल की तरह काम करता था मेरे और मेरे अपनों के बीच। दुआओं में पोस्टमैन का भी नाम खुद ब खुद आ जाया करता था। सुख दुःख का साथी सा बन गया था वो। फौजियों की तरह सेवा भाव लिए दूरियों को बिल्कुल मिटा दिया करता था। दिलों को जोड़ दिया करता था तभी तो दिल के करीब था वो पोस्टमैन। कोई रिश्ता ना होते हुए भी कितना पावन रिश्ता था उससे... ऐसे सभी लोगों को दिल से प्रणाम जो निःस्वार्थ भाव से दिलों को जोड़ने के लिए पुल का काम करते हैं। ... (मनोज कुमार विट्ठल) for more stories click here

फूल भी हमारा आभारी होता होगा कि हमने उसे भगवान् के चरणों में स्थान दिलवा दिया...

जगमोहन ने मोनू  से  कहा की भाई मेरे साथ फूल इकठ्ठे करने में सहायता कर दो।  मोनू  ने कहा कि भाई फूल तुड़वा कर मुझे पाप का भागी क्यों बनाते हो।  जगमोहन ने मोनू से कहा कि फूल भी हमारा आभारी होता होगा कि हमने उसे भगवान् के चरणों में स्थान दिलवा दिया, क्योंकि वह खुद तो भगवान् के श्री चरणों में जाने के लिए सक्षम नहीं है।  जगमोहन का सुन्दर सा जवाब सुनकर मोनू मुस्कुराते हुए फूल तोड़ने लग गया।  (मनोज कुमार विट्ठल) for more stories click here

कर्ण का न्याय

  कर्ण ने अर्जुन से कहा कि आपने जो मेरा कार्य सम्पन्न किया है उसका मेहनताना आप मेरे मित्र दुर्योधन से ले लीजिए। अ र्जुन ने कर्ण से कहा कि प्रिय कर्ण आप मेरे भाई दुर्योधन के मित्र होने के नाते मेरे भी मित्र हुए, और उम्र में मुझसे बड़े होने के नाते मेरे लिए आदरणीय भी हैं। अर्जुन ने कर्ण से आगे कहा कि आपने चार माह पूर्व भी मुझे इस कार्य हेतु बुलाया था, पर मैंने आपसे अनुग्रह किया था कि कृप्या पहले आप भाई दुर्योधन से अनुमति दिलवा दें, क्योंकि भाई दुर्योधन मुझसे किसी कारणवश नाराज़ चल रहे हैं, तब आपने मुझे बताया था कि भाई दुर्योधन मेरे द्वारा आपका कार्य करने की अनुमति नहीं दे रहे। अर्जुन ने कर्ण से आगे कहा कि अब चार महीनों बाद आपने मुझे यह कहकर बुलाया कि आपने दुयोधन से कार्य हेतु अनुमति ले ली है और पारिश्रमिक भी तय कर लिया था। अबकी बार मै आपके अनुरोध पर आपके विनम्र स्वभाव को देखते हुए आपकी सहायता हेतु आपके कार्यस्थल पर दो दिन परिश्रम करता हूँ। तो इस स्थिति में मुझे पारश्रमिक भाई दुर्योधन से क्यों लेना चाहिए ? अर्जुन ने कर्ण से आगे कहा कि मैं तो आपके कार्यस्थल पर कार्य करने हेतु इस लिए भी तै...

सत्यम और सविता

सत्यम काफी दिनों से बीमार चल रहा था और चिड़चिड़ा हो गया था। पास बैठी पत्नी सविता से नाराजगी जता रहा था कि तुम तो मेरे मरने के बाद दूसरा विवाह कर लोगी।  काफी रात हो गई थी । सत्यम बीमारी से काफी परेशान था, अचानक से यमराज प्रकट हुए उन्होंने सत्यम से कहा चलो मेरे साथ, तुम्हारा समय आ गया। सत्यम ने कहा प्रभु मैं तो चलने को तैयार हूँ लेकिन मेरे पैर जकड़े हुए हैं आप ही थोड़ा जोर लगाएं जिससे मैं मुक्त होकर आपके साथ चल सकूँ...बस इसी जद्दोजहद में सत्यम की नींद टूटी तो वो क्या देखता है कि सविता उसके पाँवो को पकड़े हुए आँखे मूंदे हुए प्रभु सिमरन कर रही है। अब क्या था, सत्यम की अश्रुधारा तो रुकने का नाम ही ना ले रही थी... (मनोज कुमार विट्ठल) for more stories click here

मंथन (आत्मपरीक्षण Introspection)

मेरे दोस्त नीलकंठ   का व्हाट्सएप्प   पर   मेसेज आया "जरूरी नहीं हमेशा बुरे कर्मो की वजह से ही , दर्द सहने को मिले...कई बार हद से   ज्यादा अच्छे होने की भी क़ीमत चुकानी पड़ती है...।" मैंने देखा की मेसेज संजीदा है तो मैंने सोचविचार करके अपने विचार रखे "   दर्द देने वाला सहने की शक्ति भी देता है. हफ्ता पहले मुझे 2 दिन सांस लेने में दिक्कत रही तब अपने आप ही दिलोंदिमाग में मंथन शुरू हो गया।   माँ प्रकृति से वार्तालाप तीव्र हो गई ।   क्योंकि तकलीफ इतनी थी की ऐसा लग रहा था कि पता नहीं अगली सांस ही आखिरी ना हो। न्यूट्रल   हो गया था मैं। ( Nuetral, Indifferent  उदासीन ,   अनासक्त  ,  आसक्तिरहित  )  इच्छाएँ तो छोड़ो एक ही ईच्छा हो रही थी की माँ प्रकृति कि   गोद में लम्बी तान के सोने का समय आ गया। पर इतना खुशनसीब कहाँ , माँ ने कहा अपनी जिम्मेवारियाँ निभा ले..." 😊 नीलकंठ ने लिखा "बच्चे खुशनसीब हैं , पिता के बिना खुशियाँ नहीं मिलतीं" मैंने लिखा "तभी तो कहते हैं ना , जिसका कोई नहीं उसका तो खुदा (माँ प्रकृति) है...

खा ले मेरे राजा बेटा, तू तो मेरा शेर है...

मैंने अपने दोस्त अवतार को व्हाट्सएप्प पर संदेश भेजा "वक्त से लड़कर, जो नसीब बदल दे ! इन्सान वही जो, अपनी तक़दीर बदल दे ! कल कया होगा, कभी मत सोचो ! क्या पता कल वक्त खुद, अपनी तस्वीर बदल दे !" अवतार का जवाब आया "यार ये बातें पढ़ने में ही अच्छी लगती हैं, असल जिंदगी में ऐसा नहीं होता" मैंने समझाते हुए जवाब दिया "अबे कुछ बातें होंसला बढ़ाने के लिए होती हैं, जैसे माँ अपने बेटे से कहती है "खा ले मेरे राजा बेटा,  तू तो मेरा शेर है"... (मनोज कुमार विट्ठल) for more stories click here     

टूटता तारा देखकर मैंने माँगा ...

नींद ना आने  की वजह से छत पर टहल रहा था कि अचानक आसमान में टूटता तारा देखकर मेरे मन में भी आया कि आज ऊपर वाले से कुछ मांग लिया जाये। तबियत ठीक नहीं थी तो क्या था मैंने झट से प्रार्थना की 'हे माँ प्रकृति (माँ भगवती, माँ महाकाली, माँ अम्बे) ॐ शांति शांति शांति, माँ तीनों लोकों में सुख शांति हो '। एक बार तो मन में आया अरे यार अपने लिए माँगना था, लेकिन भीतर मन में अपार खुशी, सन्तोष था, माँ प्रकृति के लिए धन्यवाद था कि माँ आपने मेरे मुख से तीनों लोकों के लिए सुख शांति मंगवा ली। ... (मनोज कुमार विट्ठल) for more stories click here

Intelligence with Polite Gesture (समझदार होने के साथ विनम्र भाव)

समझदार होने के साथ विनम्र भाव (spirit) सामने वाले को प्रोत्साहित, मजबूर करता है अपना ज्ञान साँझा करने के लिए... Being  sensible/intelligent,  humble spirit encourages  and compels others  to share  their knowledge... (मनोज कुमार विट्ठल) for more stories click here

तीन रंग नइ मिलने बिब्बा, हुस्न जवानी ते माँ पे (Tin Rang) / Three colours of life 'beauty', 'youthfulness' & 'parent' never gifted by 'Mother Nature' again...

आँखे नम थीं, बब्बल अपने पिताजी को याद कर रहा था। ईश्वर से गुफ्तगू चल रही थी, "हे ईश्वर एक पीढ़ी के अंतर (generation gap) की वजह से पिता पुत्र में छोटा मोटा मन मुटाव तो होता है लेकिन मेरी एक नादानी ऐसी थी जिसे मैं शायद आज पिता के हमेशा के लिए आपके पास चले जाने के बाद सहन ना कर पाऊं, कृपया मेरी उस नादानी को मेरे स्मृतिपटल (memory) से हमेशा हमेशा के लिए मिटा दें।" बब्बल ने पिछले लंबे समय से पिता की खूब सेवा की, पिता चलते फिरते ही प्रभु के धाम गए। कब आँख लगी पता ही नहीं चला, चिड़ियों की चहचहाहट से बब्बल की नींद खुली, पास ही बेटी तान्या बैठी थी जैसे पिता के जागने का इन्तजार कर रही हो। बब्बल ने बेटी को गोद में बिठाया और कहा "बेटा उदास क्यों हो रही है, दादाजी भगवान के घर ही तो गए हैं। और तू चिंता ना कर मैं तो तेरे और तेरी बहन युक्ता के बच्चों के भी बच्चों की शादियों में भंगड़ा डालने के बाद ही प्रभु के घर जाऊँगा।" तान्या ने मुस्करा कर पिता को गले लगा लिया। (मनोज कुमार विट्ठल) for more stories click here

बाणों की शैय्या the arrow bed

भीष्म ने अपने शरीर को त्यागने  के लिए तीर के बिस्तर पर सर्दियों के संक्रांति या उत्तरायण के पहले दिन के लिए लगभग 58 रातों तक इंतजार किया। मेरे मित्र का प्रश्न था "58 दिन तक भीष्म को क्या खिलाया गया"  । मैंने कहा "पहला सवाल ये होना चाहिये की कोई 58 सेकंड भी बाणों की शैय्या पर जिंदा रह सकता है?  एक माँ बच्चे को सुलाने के लिए उसको डराती है मुन्ना सो जा नहीं तो बाहर घूम रही चुड़ैल अंदर आ जायेगी और तुझे खा जाएगी...अगर हम  उस बच्चे की तरह  से  अपने ग्रन्थों को  मान लें और पालन भी कर लें  तो भी हमारा जीवन सफल हो जाये, जय श्री राम, जय माता दी....🙏😊" Bhishm did wait for about 58 nights for the winter solstice or first day of Uttarayana to give up his body on the arrow bed. My friend asked "For 58 days what was fed to Bhishma" I said "The first question should be whether anyone can stay alive for 58 seconds on the bed of the arrows? A mother scares the child to put him to sleep saying witch wandering outside will come in and eat you .. ....

रूठा दोस्त मनाना (Consoling Displeased Friend)

व्हाट्सएप्प पर मेरे दोस्तों के ग्रुप पर एक डांस करते हुए युगल जोड़े का वीडियो आया।  उसका शीर्षक था  "नोटों की गड्डियां निकाल लो गजब का मुजरा सेंड कर रहा हूं"। मुझे ये वीडियो अच्छा लगा मैंने मेसेज किया "it's not joke, art must be appreciated..." (यह मजाक नहीं है, कला की सराहना की जानी चाहिए ...) अब दूसरी तरफ से मेसेज आया  "manoj ji ye samay jyada sochne or dimag tention maie nhi  rakhney ka ye jindgiee na milegie dobara, na school na collage na job koi tention nhi lene ka, Full masti full enjoy dosti or parivaar k sath bs majje hi majje. Baki fir b schne ka too bhai ........tu soch😄😄😄😄🙃🙃🙃🙃🙃" मैं समझ गया था कि यह दोस्त अपसेट हो गया है... मैंने मेसेज किया "मैंने सच में एन्जॉय किया इस वीडियो को...और जो मैंने लिखा वो सिर्फ मेरी सोच थी, किसी के लिए कोई एडवाइस नहीं थी..फर्क इतना रहा कि आपने और मैंने इस विडियो को अलग अलग नज़रिये से एन्जॉय किया 😃👍 किसी ने मुझे समझाया था कि अपनी बात को इस तरह से सामने रखो कि सामने वाला किसी भी तरह से उसका ग...

मोहन से भी डर और प्यार के फलीभूत आकस्मिक प्रतिक्रिया हो गई थी...

माँ ने दौड़ कर सड़क पर दौड़ते हुए बच्चे को पकड़ा, दो चार थप्पड़ रसीद किये और बच्चे को गोद में उठा कर गले लगा कर रोने लगी...ये घटना देखकर मोहन को भी अपनी बेटी की याद आ गई।  कुछ दिन पहले मोहन ने गुस्से में आकर अपनी बेटी को थप्पड़ मार दिया था, और चार पाँच दिन तक अकेले में पश्चाताप में रोता रहा था, लेकिन बेटी को सॉरी नहीं कह पाया। लेकिन आज की घटना ने मोहन के अशांत मन को शांत कर दिया था जैसे उस माँ ने अपने बच्चे की नादानी पर अपने डर और प्यार से प्रतिक्रिया की थी उसी प्रकार मोहन से भी डर और प्यार के फलीभूत आकस्मिक प्रतिक्रिया हो गई थी... और शॉर्ट  स्टोरीज के लिए क्लिक करें   

क्योंकि मैं आपके सिवा किसी और को पापा नहीं कह सकता

किशन ने अपनी बीवी से तलाक के डेढ़ साल बाद घर वालों और दोस्तों द्वारा समझाने पर दूसरी शादी के लिए हाँ कर दी । एक सुशील लड़की के साथ रोका भी हो गया।  काफी दिनों  बाद किशन के मित्र मोहन का फ़ोन आया।  मोहन ने पूछा "किशन भाई क्या बात हो गई आपने शादी के लिए बुलाया नहीं, कहीं दोस्तों को भूल तो नहीं गए थे और चुपचाप शादी तो नहीं कर ली ?" किशन ने कहा " नहीं भाई ऐसी बात नहीं है, मैंने उस लड़की को मना कर दिया है। मोहन ने पूछा "क्यों ?" किशन ने कहा " यार बेटे ने मुझे कहा की पापा अगर मम्मी ने दूसरी शादी कर ली तो मैं आपके पास आ जाऊँगा क्योंकि मैं आपके सिवा किसी और को पापा नहीं कह सकता, प्लीज पापा आप किसी और से शादी मत करना। ... और शॉर्ट  स्टोरीज के लिए क्लिक करें  

AUTHORITY OF MOTHER करुणा का अधिकार (हक़)

करुणा ने बेटे अमृत और बहु अम्बुदा को अपने गहने दिखाते   हुए अपनी इच्छा भी जाहिर कर दी कि   यह आभूषण (जो मात्र 3 % ही था) अपनी बेटी को दे दूंगी।   तीसरे दिन घर की अलमारी से सारे 100 % आभूषण गायब थे। नौकरानी का 3 बार रिमांड हुआ तीनों बार उसकी स्टेटमेंट एक ही थी... केस रफादफा हो गया।   करुणा ने शादी के 17   साल बाद पति के देहान्त के बाद अपनी नौकरी के दम पर अपने शरीर को कष्ट देकर बच्चों को पढ़ाया और शादियाँ कीं और बाकि जमापूँजी से ये आभूषण भी तैयार किये। अपनी मेहनत के पैसों को किस तरह से खर्च करना है इस का हक़ करुणा से छीन लिया गया था... karuna ne bete amrt aur bahu ambuda ko apane gahane dikhaate hue apanee ichchha bhee jaahir kar dee ki yah aabhooshan (jo maatr 3 % hee tha) apanee betee ko de doongee. teesare din ghar kee alamaaree se saare 100 % aabhooshan gaayab the. naukaraanee ka 3 baar rimaand hua teenon baar usakee stetament ek hee thee...kes raphaadapha ho gaya. karuna ne shaadee ke 17 saal baad pati ke dehaant ke baad apanee naukar...

Reaction (रिश्तों में प्रतिक्रिया)

करतार के बच्चों की शिकायत ये थी "कि दादी माँ तायाजी के बच्चों की हर डिमांड पूरी कर देती हैं और हमें नज़रअंदाज़ कर देती हैं"... करतार भी बच्चों की बातों से प्रभावित था और अपनी माँ से दूरी बनाने लगा । करतार के दोस्त मोहन ने करतार को समझाया कि माँ बाप के लिए सभी बच्चे एक समान होते हैं बस कहीं कहीं माँ बाप उस बच्चे की कुछ ज़्यादा मदद कर देते हैं जिसका जीवन स्तर बाकी बच्चों से निम्न होता है...अगर करतार आज इस सच्चाई को अपने जीवन में स्वीकृति दे देता है और माँ के निर्णय का आदर करता है तो कल उसके बच्चे भी उसके कार्यों का आदर करेंगे...

Storyteller - Short Stories By Manoj Kumar Vitthal

Mann ki baat (feelings of heart) in form of Short Stories. Parallel website is  https://www.facebook.com/Storyteller-Short-Stories-By-Manoj-Kumar-Vitthal-270899040519207/

Idol's Creator, Blessed by Maa Saraswati !

Dada !  Artist Mr. Biswajit Pal (Mob.+918447549263), blessed by Maa Saraswati, creates Idols of Maa Kali, Maa Durga, Maa Saraswati, Maa Jagadhatri at Kali Bari Temple, Mandir Marg,New Delhi-110001.  दादा की यह फोटो एक कहानी अपने भीतर संजोय हुए है, मैं दादा की एक फोटो दुर्गा पंडाल के साथ लेना चाहता था, मुझे गार्ड को समझाना पड़ा कि  वह दादा को पंडाल के भीतर आने से ना रोके क्योंकि यही वे शख्श  हैं जिन्होंने अपने हाथों से इस पंडाल को बनाया है...यही एक विडंबना (कष्टकर स्थिति) थी जिसने मुझे इस ब्लॉग को लिखने के लिए प्रेरित किया... Above photo of Dada has a story within it...as I wanted to portray Dada with Maa Durga Pandal, I had to instruct the 'guard' that he should not stop the 'Dada' from coming inside the pandal because this is the person who has made this pandal with his own hands ... This was the irony (painful situation) which motivated me to write this blog... काली बाड़ी मंदिर से सम्बंधित फोटोज :  https://www.f...

Khamoshi Todo...

ख़ामोशी तोड़ो  विद्यालय के नोटिस बोर्ड पर बच्चों को प्रेरित करने के लिए एक पोस्टर लगा था, जिस पर समझाया जा रहा था कि बच्चे अपने ऊपर और अपने साथी पर किसी भी तरह का अन्याय ना सहें, अन्याय के ख़िलाफ़ आवाज उठायें और डट कर मुकाबला करें। प्रिंसिपल साहिबा से मैं पिछले डेढ़ दशक से परिचित  हूँ।  विद्यालय की प्रबंधक कमिटी के एक सदस्य जिनका विद्यालय की कार्यप्रणाली से कोई लेना देना नहीं है, वक्त बेवक्त प्रिंसिपल साहिबा के कक्ष में आ जाया करते हैं और हर आने जाने वाले के कार्य में बाधा डालते हैं।  मैंने प्रिंसिपल साहिबा के समक्ष उस पोस्टर और प्रबंधक कमिटी के उन सदस्य के बर्ताव की तुलना की। प्रिंसिपल साहिबा ने भी स्वीकार किया की हम बच्चों को जो पढ़ाते हैं उसी बात को वास्तविक जिंदगी में चाह कर भी काफी परिस्थितियों में अमल में नहीं ला पाते।

Over Confident Student !

शुभम ! परीक्षा की पूरी तैयारी है ना ? शुभम का जवाब होता है "हांजी पापा "... शुभम के पापा एग्जाम सेंटर के बाहर ये सोच कर रुक जाते हैं कि अभी 10 बजने में 10 मिनट हैं जब सब बच्चे अपनी अपनी क्लास में चले जायेंगे तो घर लौट जाऊँगा। तभी शुभम घबराया हुआ आकर कहता है "पापा एग्जाम एडमिट कार्ड तो घर पर ही रह गया...." दोनों स्कूल टीचर के पास पहुँचते हैं, उनकी बात सुनकर मैम मुस्करा देती हैं और अपने फोल्डर में से शुभम की एडमिट कार्ड की सेकंड कॉपी निकाल कर शुभम को दे देती हैं... शुभम के पापा टीचर का शुक्रिया अदा करते हैं और कहते हैं "मैम , शुभम अपने अति आत्मविश्वास की वजह से अपना एडमिट कार्ड भूल गया "।  मैम शांत भाव से कहती हैं "कोई बात नहीं, शुभम टेंशन मत लो और पूरे  विश्वास के साथ लगन से परीक्षा दो...गॉड ब्लेस्स..." ।