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बाणों की शैय्या the arrow bed

भीष्म ने अपने शरीर को त्यागने  के लिए तीर के बिस्तर पर सर्दियों के संक्रांति या उत्तरायण के पहले दिन के लिए लगभग 58 रातों तक इंतजार किया। मेरे मित्र का प्रश्न था "58 दिन तक भीष्म को क्या खिलाया गया" ।
मैंने कहा "पहला सवाल ये होना चाहिये की कोई 58 सेकंड भी बाणों की शैय्या पर जिंदा रह सकता है? एक माँ बच्चे को सुलाने के लिए उसको डराती है मुन्ना सो जा नहीं तो बाहर घूम रही चुड़ैल अंदर आ जायेगी और तुझे खा जाएगी...अगर हम उस बच्चे की तरह से अपने ग्रन्थों को मान लें और पालन भी कर लें  तो भी हमारा जीवन सफल हो जाये, जय श्री राम, जय माता दी....🙏😊"

Bhishm did wait for about 58 nights for the winter solstice or first day of Uttarayana to give up his body on the arrow bed. My friend asked "For 58 days what was fed to Bhishma" I said "The first question should be whether anyone can stay alive for 58 seconds on the bed of the arrows? A mother scares the child to put him to sleep saying witch wandering outside will come in and eat you .. . If we accept our religious texts like that child and follow them, then our life becomes successful, Jai Shri Ram, Jai Mata Di…."
(मनोज कुमार विट्ठल)
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Storyteller Short Stories By Manoj Kumar Vitthal

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