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AUTHORITY OF MOTHER करुणा का अधिकार (हक़)


करुणा ने बेटे अमृत और बहु अम्बुदा को अपने गहने दिखाते हुए अपनी इच्छा भी जाहिर कर दी


कि  यह आभूषण (जो मात्र 3 % ही था) अपनी बेटी को दे दूंगी।  तीसरे दिन घर की अलमारी से सारे 100 % आभूषण गायब थे। नौकरानी का 3 बार रिमांड हुआ तीनों बार उसकी स्टेटमेंट एक ही थी... केस रफादफा हो गया। करुणा ने शादी के 17 साल बाद पति के देहान्त के बाद अपनी नौकरी के दम पर अपने शरीर को कष्ट देकर बच्चों को पढ़ाया और शादियाँ कीं और बाकि जमापूँजी से ये आभूषण भी तैयार किये।
अपनी मेहनत के पैसों को किस तरह से खर्च करना है इस का हक़ करुणा से छीन लिया गया था...
karuna ne bete amrt aur bahu ambuda ko apane gahane dikhaate hue apanee ichchha bhee jaahir kar dee ki yah aabhooshan (jo maatr 3 % hee tha) apanee betee ko de doongee. teesare din ghar kee alamaaree se saare 100 % aabhooshan gaayab the. naukaraanee ka 3 baar rimaand hua teenon baar usakee stetament ek hee thee...kes raphaadapha ho gaya. karuna ne shaadee ke 17 saal baad pati ke dehaant ke baad apanee naukaree ke dam par apane shareer ko kasht dekar bachchon ko padhaaya aur shaadiyaan keen aur baaki jamaapoonjee se ye aabhooshan bhee taiyaar kiye. apanee mehanat ke paison ko kis tarah se kharch karana hai is ka haq karuna se chheen liya gaya tha...

Storyteller Short Stories By Manoj Kumar Vitthal

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